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प्रश्नोत्तर P22-0127 · भाग 22

गुरु जी, आप कहते हैं ईमानदारी और सत्कर्म करो; लोग कोशिश कर रहे हैं पर पूरी तरह नहीं आ पाए। जो चीज हमें सिखाई जाती है, मन उसे ना करके दूसरी तरफ जाता है — जैसे बच्चे को बोल दिया कि वहां नहीं जाना है तो उसे वहां का पता ही दे दिया। तो क्या समाज इस कारण खराब हो रहा है कि उसे अच्छा बनाने की कोशिश की गई?

नहीं, ऐसा नहीं है। समाज इसलिए खराब नहीं हो रहा है। कोई भी व्यक्ति अगर खराब हो रहा है तो अपने लालच से। समाज में दो चीजें हैं — एक लालच और एक फ्री में पाने की इच्छा, मतलब योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा। ये जब तक रहेगी, आप भटकते रह जाओगे। ये दो चीजें अगर आपके अंदर हैं तो दुनिया में कहीं भी भटकोगे; और दोनों नहीं हैं तो आप भटक भी नहीं सकते और आपको कोई भटका ही नहीं सकता। इन दो के साथ जिंदगी नर्क है; जिंदगी से ये दो हटा दो तो फिर आनंद ही आनंद है। यहां भी फ्री में कुछ नहीं है — यहां साधक के लिए व्यवस्था है; आप साधना कर रहे हैं इसलिए आपको मिल रहा है, मतलब आप मेहनत की रोटी खा रहे हैं। यहां मुफ्त का कोई खा ही नहीं पाएगा, मुफ्त वालों को मैं तुरंत भगा देता हूं। मैं कभी फ्री वाली लाइन में खड़ा नहीं होता, और लोगों से यही कहता हूं — लालच में फ्री में पाने की इच्छा कभी मत करना, अगर किए तो लूट लिए जाओगे।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19