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प्रश्नोत्तर P22-0126 · भाग 22

गुरु जी, तो क्या अच्छाई करने के चक्कर में बुराई है? बचपन में एक समय ऐसा था जब हमें कुछ भी नहीं मालूम था, फिर एकदम से अच्छाई बताई गई — ऐसा क्यों?

नहीं, ऐसा नहीं है। अच्छाई के चक्कर में बुराई नहीं है। हमें समाज सिखाता है कि तुम्हारे लिए क्या उचित है, क्या अनुचित है। जैसे समाज सिखाता है कि ये शुद्ध जल है या गटर का जल है — क्योंकि गटर का पानी पियोगे तो तबीयत खराब हो जाएगी। अगर समाज शिक्षा नहीं देता तो मैं गटर का भी पानी पी लेता। आज जितनी भी जानकारियां हमारे पास हैं, जीवन जीने के लिए हैं; लेकिन आप उससे दूसरे को नीचे दिखाने के लिए जीने लगे — गड़बड़ ये हो गई। आपको अच्छाई-बुराई का परिचय इसलिए कराया गया था कि आप उचित तरीके से जीवन जिएं। सांप की पहचान इसलिए कराई गई कि और जानवर की तरह सांप को हाथ मत लगाना, नहीं तो काट लेगा; शेर का परिचय इसलिए कि हिरन को गले लगाते हो, शेर को मत लगा लेना। और पहले आपको बुराई बताई गई, अच्छाई नहीं — जितने भी जहरीले जानवर हैं, जिनसे खतरा है, उसकी जानकारी आपकी मां ने पहले दी, क्योंकि अच्छे से डरने की जरूरत नहीं है। पहले बुरे की जानकारी दी गई ताकि आप उचित तरीके से जीवन जी सकें।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19