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प्रश्नोत्तर P22-0129 · भाग 22

गुरु जी, अगर वे फ्री में देंगे तो लोग भी फ्री में ही लेंगे ना?

जरूरतमंद को हमें फ्री में देना चाहिए, अगर हमारी सामर्थ्य है। देखो, जीवन बहुत रहस्यमय है, इसे बहुत गहराई से समझो। मैं एक तरफ यह भी कह रहा हूं कि फ्री में पाने की इच्छा छोड़ो, और एक तरफ ये भी कह रहा हूं कि जरूरतमंद की सेवा करो। फ्री में पाने की इच्छा छोड़ने की बात मैं उन्हें कह रहा हूं जो सामर्थ्यवान हैं — वे कर सकते हैं, तो फ्री में पाने की इच्छा क्यों करते हैं? और जो नहीं कर सकता, अगर मैं उस लायक हूं तो मुझे उसकी सहायता करनी चाहिए। वहां फ्री की बात ही नहीं है, वहां सिर्फ एक जरूरत है। कोई गिर गया, आप उसे उठाकर अपनी गाड़ी से हॉस्पिटल पहुंचा रहे हो — क्या उसका भाड़ा लोगे? वहां मानवता हो गई, वहां पैसे की बात ही नहीं है। लेकिन एक आदमी कह रहा है कि मैं जा सकता था, लेकिन मुझे उठाओ, गाड़ी में बैठाओ, फ्री में छोड़ो — तो नहीं छोड़ना है। हमारी जैसी सामर्थ्य है, हमें जरूरतमंद की सेवा करनी चाहिए — चाहे धन से, चाहे तन से, चाहे ज्ञान से। रास्ते में कोई रास्ता बताता है या पानी पिलाता है, तो क्या वहां पैसे की बात कर सकते हो? वह फ्री में भी नहीं दे रहा, और वहां पैसा पूछ भी नहीं सकते। जीवन बहुत समझ के जीना है, फिर आपको कोई ठग नहीं पाएगा।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19