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प्रश्नोत्तर P22-0130 · भाग 22

गुरु जी, एक डॉक्टर यहां आते हैं, उन्होंने कहा था कभी भी जरूरत हो तो फोन करना। एक माता जी को चोट लगी तो उन्हें बुलाया; बाद में मैंने साइड में कहा कि डॉक्टर साहब कुछ फीस ले लिया करो, तो बोले "नहीं, आपका आशीर्वाद बहुत है।" फिर मैंने कुछ नहीं बोला। मैंने अपनी बात रख दी, अब मुझे संकोच नहीं लगता — इसे कैसे समझें?

यहां मानवता की बात आ गई, यहां फ्री की बात नहीं आई, क्योंकि सामने वाले ने कहा भी नहीं। और ये कहने के बाद भी अगर आपको संकोच है तो वह आपका है — संकोच आपका है क्योंकि आप उनको कुछ नहीं दे पा रहे। एक व्यक्ति ने मना कर दिया कि "आपका आशीर्वाद बहुत है", फिर भी आपको लग रहा है कि अब मैं उनसे काम नहीं करवा पाऊंगा — तो कहीं ना कहीं आपका अहम काम कर रहा है। उसे सेवा का मौका दीजिए ना। ऐसे व्यक्तियों को सेवा का मौका दो।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19