प्रश्नोत्तर P22-0139 · भाग 22
गुरु जी, भगवान तक तो समझ में आया — पर "भगवान परमात्मा की यात्रा करता है" इसका क्या अर्थ है?
भगवान एक पद है — जैसे शिक्षक एक पद है, ड्राइवर एक पद है, इंजीनियर एक पद है। भगवान किसे कहा गया? ताकतवर को। तो वह फिर उस परम की, जहां से वह है, उसकी यात्रा करता है। अभी तो यात्रा थोड़ी ना हो रही है — अभी तो हम अपने आप को निकालने की बात कर रहे हैं। अभी तो अनेक पिंड से, राग-द्वेष में हम फंसे हुए हैं; उससे निकालने के लिए बातचीत हो रही है — कि मैं कैसे अपने आप को निकाल लूं अशांत भरे जीवन से, राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा-अपेक्षा, मेरा, कर्ता के भाव से, भ्रम से। जब निकाल लोगे, उसके बाद यात्रा की शुरुआत होगी।
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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19