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प्रश्नोत्तर P22-0147 · भाग 22

गुरु जी, कभी-कभी झलकियां आती हैं — अपने आप में होते हैं तो आंखों से आंसू आ जाते हैं, सब कुछ अच्छा लगता है, कुछ नहीं चाहिए, लगता है सब छोड़ने को तैयार हूं। पर वह फीलिंग टुकड़ों में आती है, कंटिन्यूस नहीं रहती। जैसे नर्मदा जी पर अकेले जाती हूं तो वह भाव होता है, लौट आती हूं तो वहां से हट जाती हूं — तो क्या मैं वहीं रहूं?

वहीं रुक जाइए। मत हटो ना। बाद में कोई हटा देगा — कीड़े-मकोड़े हटा देंगे, आप टेंशन ना लो, हटाने का प्रबंध तो हो ही जाएगा। ज्यादा से ज्यादा, कम से कम क्यों? उसी में हो जाइए।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19