प्रश्नोत्तर P22-0148 · भाग 22
गुरु जी, वह अनुभव टुकड़ों में आता है और फिर लगता है और चाहिए, और चाहिए — वह रिपीट नहीं होता क्योंकि हम फिर कुछ एक्सपेक्ट कर रहे होते हैं। बैठते हैं तो देखते हैं कि वे क्षण क्यों नहीं आ रहे, वह एहसास क्यों नहीं हो रहा। आंखें बंद करके देर तक बैठती हूं तो कुछ कॉन्स्टेंट होता है, फिर निकल जाता है।
अरे आप उससे आगे का करो, आगे निकलो। जान के, समझ के टिके रहना है — टिकेंगे तब, जब बाहर वापस नहीं जाना है। आंखें बंद करती हो तो फिर खोलती क्यों हो? मत खोलो ना — बंद तो बंद। मूल में तो अभी भी हो, कहीं और हो क्या? असल में हमारे साथ क्या हो रहा है — कुछ में हम वह कुछ ढूंढ रहे हैं जो उस कुछ में है ही नहीं, इसलिए हम परेशान हैं, बस इतनी सी बात है। पूर्ण अपने आप को अपूर्ण से पूर्ण करना चाहता है — यही उसकी अपूर्णता है। अगर वह इस भाव को छोड़ दे, तो वह पूर्ण है। जो कुछ है उस कुछ का उपयोग करके, जो ढूंढ रहा है उस ढूंढने से वह मुक्त हो जाए, तो अपने आप में हो जाता है।
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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19