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प्रश्नोत्तर P22-0180 · भाग 22

गुरु जी, आप इतनी अच्छी लाइफ जीते हुए सब कुछ कैसे छोड़ दिए? क्या हम भी छोड़ सकते हैं?

पकड़ने के लिए कुछ था ही नहीं। हाथ में ही कुछ नहीं आया — इस दुनिया में ऐसा कुछ लगा ही नहीं जिसे मैं पकड़ूं। कुछ है तो आप ही बताओ — क्या है? जो भी पकड़ोगे, छूट जाएगा; तो फिर पकड़ना क्या? जो मेरे साथ ही नहीं रहेगा, उसे क्या पकड़ना? सब चेंज हो रहा है। अगर कुछ होता तो मैं जरूर पकड़ता, क्योंकि मैंने भी पकड़ने का प्रयास किया — ऐसा नहीं कि पकड़ने में मैं नहीं गया; मैंने भी गोते मारे, मैं भी कूदा, लेकिन देखा तो पकड़ने के लिए कुछ है ही नहीं। बस एक-दूसरे को पकड़ने का भ्रम है, और उस भ्रम में लोग पकड़े हुए हैं। तो भैया, इस भ्रम से हट जाओ।

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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19