प्रश्नोत्तर P22-0195 · भाग 22
गुरु जी, दर्शन का एक अर्थ यह भी आता है कि किसी कॉन्सेप्ट के पीछे, किसी चीज के पीछे उसकी जो गहराई है, उसका जो तत्व है, उसको जानना-समझना।
जानने से मुक्त होना है। समझना भी इसलिए है कि समझने से मुक्त होना है। ऐसे तो हमें कुछ समझना नहीं है, लेकिन समझने में आ गए, तो समझते-समझते समझने से मुक्त होना है — तभी आप अपने आप में स्थिर हो पाएंगे, चाहे आप समझ के मुक्त हो जाएं, चाहे बिना समझे। खोजते-खोजते खोजने के लिए कुछ नहीं बचता, खोजी बचता है, और फिर बाद में खोजी भी खत्म हो जाता है; उसके बाद शेष बचता है सत्य, और सत्य ब्रह्म की यात्रा करवाता है। अनुभव करते-करते अनुभव करने के लिए कुछ नहीं बचता; जब अनुभव करने के लिए कुछ नहीं रहा तो अनुभव करने वाला भी खत्म हो जाता है, शेष बचता है सत्य, और वह ब्रह्म की यात्रा करवाता है। जब तक खोज है, तभी तक खोजी है।
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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13