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प्रश्नोत्तर P22-0198 · भाग 22

गुरु जी, समझ के काम करना तो जीवन के हर छोटे-छोटे पहलू से जुड़ा ही हुआ है। और इस दृष्टि से तो, स्वामी जी, यह समझने वाला भी सदा नहीं है।

व्यवहारिक जगत की आप बात कर रहे हो, मैं आपकी बात कर रहा हूं। समझ के, जरूरत में हमें जीना था। पशुओं को कोई नहीं सिखाता, उन्हें भी पता है कि क्या मेरे लिए ठीक है क्या नहीं — बंदर भी देखो, सूंघता है, फेंक देता है या खा लेता है। जीवन जीने की बात अलग है; मैं इस समय आपकी बात कर रहा हूं, इस पेट की बात नहीं कर रहा। समझने के लिए तो कुछ है ही नहीं, लेकिन समझने की आदत लग गई — लोगों ने लगा दी, हमने भी पकड़ ली। बताइए, इस संसार में क्या है समझने के लिए, जिसे समझने से आपका कल्याण हो जाएगा? यह था, है और रहेगा — ऐसा कुछ बाहर बता दो। और आप ही कह रहे हो समझने वाला भी सदा नहीं — तो फिर क्या समझना चाहते हो? समझना भटकाव है।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13