प्रश्नोत्तर P22-0199 · भाग 22
महाराज जी, हमने उपनिषद वगैरह पढ़े तो हैं, सब कुछ शब्दों में तो जान गए, लेकिन सुबह उठते ही फिर हमारे लिए वही बातें हो जाती हैं — यह सब बड़ी भारी समस्या है।
तो मैं तो बस इतना आप लोगों को बोल रहा हूं — जरूरत में जियो, ईमानदारी सत्कर्म अपना लो, उपलब्धि हो जाएगी। कोई संशय हो तो मुझे बोलो। और इसके अलावा कोई और रास्ता हो तो मुझे बताओ। पलायन करना भी तो नहीं — पलायन करके कहां जाओगे, क्या करोगे? जगह बदलने से क्या आपकी स्थिति बदल जाएगी? गंगाजल को स्टील के बर्तन में रख दो, गटर के पानी को सोने के बर्तन में रख दो, तो क्या बाहर के पात्र से अंदर वाला बदल जाएगा? आपको सोने के सिंहासन पर बैठा दिया जाए तो आपकी स्थिति बदल जाएगी? हां, लोगों का दृष्टिकोण बदल जाएगा, लेकिन बैठने वाले को पता है कि मैं वही मामूली हूं। मामूली है तभी आवरण का सहारा लेकर बता रहा है; अगर मामूली नहीं होता तो आवरण का सहारा नहीं लेता, अपना काम करता। कमजोर व्यक्ति हमेशा आवरण का सहारा लेकर अपने आप को सिद्ध करना चाहता है कि मैं यह हूं; सामर्थ्यवान व्यक्ति अपना काम करता है, उसे आवरण से मतलब नहीं है, वह आवरण का सहारा सिर्फ जरूरत में लेता है।
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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13