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प्रश्नोत्तर P22-0200 · भाग 22

महाराज जी, अपने सुधार के लिए जो परिवर्तन है, वो अपने भीतर ही, छोड़-छोड़ के ही करना पड़ेगा। लेकिन साधना आदि की बात इसलिए उठती है कि व्यवहार जगत में परिवर्तन वाले रास्ते में व्यक्ति को समझ में नहीं आता कि यह रास्ता कितना लंबा होगा, जबकि साधना वाले तरीके एक प्रॉमिस देते हैं कि आप उसको फास्ट कर सकते हैं, जो भीतर है उसको खत्म कर सकते हैं।

कैसे? बताइए। प्रॉमिस कर रहे हो तो बताओ — पक्का कैसे होगा? उसे सिद्ध करिए। एक भी व्यक्ति दुनिया में बता दीजिए जो विधियों द्वारा पहुंचा हो — एक का नाम बताओ। आप कहते हो स्वामी विवेकानंद के गुरु जी ने शक्तिपात किया — तो फिर और शिष्यों पर क्यों नहीं किया? क्योंकि उनमें स्वामी विवेकानंद ही ऐसे थे जिसे कुछ नहीं चाहिए था। बाकियों में पात्रता नहीं थी, क्योंकि सबको कुछ ना कुछ चाहिए था। वाल्मीकि भी — रत्नाकर डाकू — ब्रह्म समान हुए; उन्हें भी कुछ नहीं चाहिए था, तब जाकर 'मरा मरा' दिया गया और बैठ गए, उसके अलावा उन्होंने कुछ किया नहीं। आप एक व्यक्ति का नाम बता दीजिए — 'कुछ नहीं चाहिए' में अगर कोई व्यक्ति हुआ, तब जाकर उसकी यात्रा होती है।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13