प्रश्नोत्तर P23-0001 · भाग 23
महाराज जी, वाल्मीकि जी अगर उल्टा ही नाम जप रहे थे, लेकिन कुछ ना कुछ कर तो रहे थे ना — एकाग्रता के साथ कुछ कर रहे थे।
चाहे उल्टा कर रहे थे, लेकिन आप ये देखिए कि उन्होंने कर्म को पूरी तरह छोड़ दिया, तुरंत उसी जगह पर। आप यह नहीं देख पाए कि उन्होंने तुरंत कर्म को पूरी तरह छोड़ दिया? इस बात को भी तो देखिए। मूल — आप क्या करते हो, वह मायने रखता है। पता चला कि आप बेईमानी-दुष्कर्म कर रहे हो और ऊर्जा कहीं से इकट्ठा कर रहे हो, तो आपका क्या होगा? उस ऊर्जा को कहां लगाओगे? वहीं लगाओगे। ईमानदारी सत्कर्म करो, और उसको करते हुए कुछ करो। मूल को पकड़ो — गलती कहां हो रही है।
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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13