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प्रश्नोत्तर P23-0002 · भाग 23

तो इसका मतलब महाराज जी, फिर उसके दो पक्ष हो गए — एक तो उन्होंने कर्म को छोड़ दिया, और दूसरा जप को अपनाया? यानी पहले वाले को पूरी तरह करके, उसे अपना आधार बनाकर, तब वे दूसरे वाले की तरफ गए?

वो पूरी तरह कर्म को छोड़ दिए, और 'कुछ नहीं चाहिए' में आ गए। इसमें आने के बाद कुछ भी मिल जाए, वह लेके अपना कल्याण कर लेगा, क्योंकि उसे अब कुछ चाहिए ही नहीं। और फिर बोलते हैं कि उनके शरीर पर दीमक तक लग गई थी। तो आप उनकी तुलना मत करिए। नाम मैंने ही बोला, इसलिए बोला कि आप समझिए। आप जहां बैठे हो, वहां का हाल यही है, क्योंकि मैं भी वहां कभी था; लेकिन मैं पूरी तरह समझकर यहां बैठा हूं। तुम्हें निकलने नहीं दूंगा, तुम्हारे हर प्रश्न का जवाब दूंगा — चाहे तुम भक्ति योग से जाओगे, चाहे ज्ञान योग से, चाहे ध्यान योग से, चाहे योग मार्ग से, कहीं से भी जाओगे, मैं तुम्हें जवाब दूंगा।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13