प्रश्नोत्तर P23-0010 · भाग 23
गुरु जी, यह जो बात कही जा रही है, वह बहुत ही हाई लेवल पर कही जा रही है। जैसे विद्यालय में टीचर बच्चों को बोलता रहे कि सच बोलो, तुम्हारा सब भला हो जाएगा — तो कितने बच्चे सच बोलने वाले होंगे? उनको सच तक पहुंचाने के लिए बहुत कुछ समझाना, एक्टिविटी करवाना पड़ता है, वह एक लंबा प्रोसेस होता है। एक छोटा सा मैसेज देकर छोड़ने से शायद ज्यादा बात बनने वाली नहीं। तो जो यहां आएगा, क्या आप उसकी स्थिति के हिसाब से उसको गाइड करते हैं?
यह पढ़िए क्या लिखा है — 'बेमतलब से आना नहीं, मतलब है तो आना नहीं।' यह आखिरी यात्रा करवाने के लिए बैठा है। मैं लाइव में भी बोलता हूं — जिसे कुछ नहीं चाहिए वो आए; अगर कुछ चाहिए तो मत आना, पछताओगे, भाड़ा-किराया भी बर्बाद हो जाएगा। यह तो मैं चिल्ला-चिल्ला के बोलता हूं। जिसे कुछ चाहिए, उसके लिए प्रत्यक्ष ज्ञान नहीं है; जिसे कुछ नहीं चाहिए — जिसका 'कुछ नहीं चाहिए' का भाव बना है — वह 'कुछ नहीं चाहिए' की स्थिति पर कैसे पहुंच जाए, उसके लिए प्रत्यक्ष ज्ञान है। यहां जितने लोग आए हैं, 'कुछ नहीं चाहिए' के लिए आए हैं, चाहे एक दिन रहें चाहे दो दिन, क्योंकि मैं ऐसा बोलता ही हूं और साधक सुनता है। अब इनको कैसे समझाना है, वह मैं समझा रहा हूं। लोग पहले मुझे सलाह देते थे कि अगर आप अच्छे कपड़े पहनें तो भीड़ लगेगी। फिर क्या होगा? मैं तो ज्ञान दे रहा हूं आखिरी के लिए, और ज्यादातर संख्या मैंने देखा 'चाहिए' में है, तो वो लोग फिर चले जाएंगे। फटे कपड़ों में वही बचता है जिसे ज्ञान चाहिए — यह फटा कपड़ा मेरा छांट देता है, मेरे पास छंट के लोग आते हैं। क्योंकि यहां आना मतलब अपने आप को खत्म करना है; खत्म करना है तो आप यहां रहो, नहीं तो जाओ।
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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13