प्रश्नोत्तर P23-0016 · भाग 23
गुरु जी प्रणाम, मेरा सवाल यह है कि हम अपने इष्ट देव को कैसे पहचानें?
या तो इष्ट देव से पूछो — इतने देवता हैं, 33 करोड़ — फिर बोलो भैया, जो मेरा इष्ट है वो आए, बताए। आप उतने सामर्थ्यवान होंगे तो आके बता देंगे। जैसे आप अनाउंस कर दो कि जिससे मुझे शादी करनी है वो आ जाए — दरिद्र रहोगे तो कोई नहीं आएगा, लोग आप पर हंसेंगे; लेकिन राजा रहोगे, राजकुमार रहोगे, तो बहुत लोग लाइन लगा लेंगे। कहने का मतलब है, सामर्थ्यवान हो तो चिल्ला दो कि जो मेरा इष्ट हो आ जाए — आ जाएगा; नहीं तो नहीं आएगा, फिर ढूंढो उसे। कमजोर होगे तो कहोगे कहीं जुगाड़ करवा दो; और सामर्थ्यवान है, योग्य है, तो रिश्ते छांटता रहता है। तो सामर्थ्यवान बनिए। गिड़गिड़ाने से कुछ नहीं होगा। मैं तो खुद कहता हूं परमात्मा से — मुझ पर कभी कृपा ना करना; अगर मुझे सड़ के मरना होगा तो मैं सड़ के मरने के लिए तैयार हूं, मेरा एक भी कर्म इधर-उधर नहीं होना चाहिए, सब भोगूंगा, मैंने किया है। जो चाहिए उसके लिए काम करो, बस बात खत्म; गिड़गिड़ाने से कुछ नहीं होता। जैसे ही काम चालू किया, आप उसके करीब होने लगे। लेकिन शुरुआत कर दो — बात मत करो।
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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13