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प्रश्नोत्तर P23-0026 · भाग 23

प्रणाम प्रभु जी, मैं और मेरी पत्नी आपके यहां आने के लिए मुंबई से निकलेंगे। मेरी पत्नी का सवाल है — पीरियड के समय अपनों की कुटिया में क्या नियम से रहना होगा?

चलिए बता देता हूं। मैं अपनी बहन के यहां रहता था; मैंने कहा भोजन बना, उसने कहा — गुरु जी, आज मैं नहीं बनाऊंगी। मैं बात तो समझ गया; बोला तू अभी क्यों नहीं बनाएगी? सुन — तेरी अशुद्धि में इतनी ताकत है कि मेरी साधना को भंग कर दे, तो मुझे ऐसी साधना भी नहीं चाहिए; मेरी साधना में इतनी ताकत है कि तेरी अशुद्धि को भी शुद्ध कर दे। तू मेरे लिए शुद्ध थी, शुद्ध है, शुद्ध रहेगी — जा, भोजन बना। तो हम मासिक धर्म, ये सब नहीं बरतते। आप मेरे लिए शुद्ध थे, शुद्ध हो, शुद्ध रहोगे; ये शरीर की क्रिया है। यहां भी किसी महिला ने अभी पुछवाया था, मैंने कहा यहां ऐसा कुछ नहीं है। मैं अपनी बहन के हाथ का भोजन करता था; फिर उसने मुझसे कभी नहीं कहा। तो भैया, आराम से आ सकते हो, हमें कोई फर्क नहीं; आपको फर्क हो तो आप देख लो। लोग बरतते हैं, हम उनको मना नहीं करते, लेकिन मैं कुछ नहीं बरतता। हम अपने जीवन में एक चीज बरतते हैं, पता है क्या? बेईमानी और दुष्कर्म — ऐसे लोगों से दूर रहता हूं, और मैं यह नहीं करता। बस, और बाकी खाओ, पियो, जियो, निकल लो — यही तो जिंदगी है।

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वीडियो: दर्शन से हमें क्या सीखना है ? #livesatsang #yogi Ji ka satsang · 2025-03-13