प्रश्नोत्तर P23-0068 · भाग 23
गुरु जी, अगर जैसे कोई डॉक्टर है — वह उस सिस्टम में काम ना करे जो लोगों ने बना दिया है, जो गलत है, तो क्या करे?
तो मत करे ना। इससे अच्छा डॉक्टरी का वो पैसा छोड़ दो। क्या गलत ही करना है? डॉक्टर का काम गलत करना है — ये कौन सा सिस्टम है? पेट के लिए रोटी चाहिए, कहीं भी मिल जाएगी; रोटी के लिए क्या बेईमानी करनी है? लोगों को लूटो — ये भी कोई सिस्टम है? समाज सबसे ज्यादा सीखता है चार से — मात-पिता, शिक्षक, डॉक्टर और गुरु। इन चार को हमेशा शुद्ध जीवन जीना चाहिए, क्योंकि चारों से लोग प्रेरणा लेते हैं और चारों को लोग भगवान का स्वरूप मानते हैं। और ये चारों इस समय गंदगी फैला रहे हैं — अपने बच्चों का भरण-पोषण बेईमानी के ढंग से कर रहे हैं, शिक्षा का व्यापार कर दिया गया है, डॉक्टर बस पैसा कमाने में लगे हैं, गुरु बनके लोग अध्यात्म को बेच रहे हैं। 99% भ्रष्ट हो गए हैं, इसलिए समाज की इतनी दुर्दशा है, बेईमानी चरम सीमा पे है। जिंदगी की शुरुआत मात-पिता से है, फिर शिक्षक, डॉक्टर के पास आना-जाना, फिर गुरु के पास — ये चार अगर सुधर जाएं तो पूरा समाज सुधर जाएगा। इन चारों का ईमानदार और सत्कर्मी होना, इनके अंदर परोपकार होना बहुत जरूरी है। इसलिए आज वृद्ध आश्रम बढ़ते जा रहे हैं — 30 साल पहले गरीबी थी, लेकिन लोग अपने मां-बाप के साथ रहते थे। इसमें बच्चे जिम्मेदार नहीं, मात-पिता जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों का भरण-पोषण बेईमानी के धन से किया। बेईमान भी बेईमान को अपने घर में रखना नहीं चाहता — बेईमान आदमी को भी घर में नौकर चाहिए तो ईमानदार चाहता है, बेईमानी करते पकड़ा गया तो धक्के मार के निकाल देता है। इसलिए जीवन में इस समय सबसे जरूरी है ईमानदारी और सत्कर्म। अपने आप को सुधारो — दूसरों को सुधारने में मत लगो।
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वीडियो: हम एकांत को बर्दाश्त क्यों नहीं कर पाते हैं ? #live #pratyakshgyan #yogijikasatsang · 2025-03-07