प्रश्नोत्तर P23-0071 · भाग 23
महाराज जी, "जरूरत" समझ में नहीं आई — जरूरत किसे कहें?
जितनी आपकी आवश्यकता है — भूख लगी तो भोजन, तन पे कपड़ा। जियो जीने के लिए; जितने में आप जी सकते हो, वही जरूरत है।
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वीडियो: हम एकांत को बर्दाश्त क्यों नहीं कर पाते हैं ? #live #pratyakshgyan #yogijikasatsang · 2025-03-07