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प्रश्नोत्तर P23-0141 · भाग 23

गुरु जी, कोई दुखी हमें पुकारे और जब हम उसकी मदद करें तो खुद तकलीफ में आ जाते हैं। आगे से दूसरों की मदद कैसे करूं, ताकि उनकी तकलीफ भी मिटा सकूं और खुद भी तकलीफ में न फंसूं?

तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार आप मदद करिए, तो आप कभी तकलीफ में नहीं आएंगे। जब सामर्थ्य से ज्यादा आप किसी की सहायता करते हो, तो आप तकलीफ में आ जाते हो। जब आप किसी की सहायता करो, तो आप देख लो कि मेरी सामर्थ्य क्या है, सामने वाले की जरूरत क्या है। कभी-कभी हम उसकी जरूरत से ज्यादा उसकी सहायता कर देते हैं, तो वह पगला जाता है। जैसे कोई व्यक्ति रास्ता पूछता है, और कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा सज्जन होता है, तो वह शुरू से सोचता है कितना अच्छा रास्ता बता दूं, पानी वगैरह भी पिला दूं — लेकिन वो हां-हां करते-करते निकल जाता है। तो किसी को उतना दो जितना वो पचा सके, नहीं तो वह क्या करेगा — आपको बेइज्जत करेगा। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। ठीक है? तो मैं आपसे एक ही बात कहूंगा कि आप उतना ही दीजिए जितना सामने वाला पचा सके।

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