प्रश्नोत्तर P23-0167 · भाग 23
गुरु जी, नाम देने वाले कहते हैं कि नाम और नामी एक हैं। इसका क्या अर्थ है?
नाम और नामी एक कैसे हो सकते हैं, आप बताइए? एक तो नहीं हो सकते, दो बात तो आ ही गई। लेकिन उनके कहने का अर्थ यह है कि अगर उस नाम में अपना मन, अपने आप को डुबो दिया, तो नाम और आप एक हो जाओ — उनका भाव यह है। एक बात बताता हूं, ध्यान से सुनना: एक सादा पेपर ले लो, और नीचे से लेकर आखिरी राष्ट्रपति तक साइन करवा लो। क्या आपको लगता है कि हर साइन का महत्व एक ही होगा? हो सकता है राष्ट्रपति पढ़ा न हो, अंगूठा ही मार दिया हो — उसकी साइन का प्रभाव कुछ अलग ही रहेगा। तो कहने का मतलब यह है कि जो व्यक्ति आपको नाम दे रहा है, क्या वह उस पद पर, उस स्थिति में है भी? और आप देख लो, जितने लोगों का नाम जप से कल्याण हुआ, उन्हें कुछ नहीं चाहिए था, और देने वाला उस परम स्थिति पर था — दोनों देखो। आज रुपयों में नाम दिया जा रहा है; देने वाले की स्थिति क्या है, वह मायने रखती है। जो खुद वासना से भरा है, वह क्या मंत्र देगा?
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वीडियो: साधक की दिनचर्या क्या होनी चाहिए ? / दिनचर्या साधक की #livesatsang · 2025-03-12