प्रश्नोत्तर P23-0183 · भाग 23
गुरु जी, रामचरितमानस की पंक्ति "ढोल गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी" का अर्थ क्या है?
शूद्र का मतलब वह होता है जिसके अंदर छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड है — वह शूद्र है। गंवार — जो सत्कर्म और दुष्कर्म समझने के बाद भी दुष्कर्म में फंसा हुआ है। ढोल — शरीर को बोला गया है; आप देखिए, ढोल के अंदर क्या है? कुछ नहीं, खाली है; इसके अंदर भी कुछ नहीं है, तुम भरा समझ रहे हो, यही तुम्हारी गलती है। पशु — ऐसे लोगों का जीवन पशु समान है। और नारी — यहां पुरुष-नारी की बात नहीं हो रही; जिसे चाहिए वह नारी है, देने वाला प्रकृति, पुरुष है। जैसे मीराबाई एक संन्यासी से मिलने गईं, उन्हें गेट पर रोक दिया गया कि मेरे गुरु स्त्रियों से नहीं मिलते; उन्होंने कहा, जाओ बोल देना कि मैं तो सोचती थी तुम्हारा गुरु गुरु है, मैं तो समझती थी बस एक ही पुरुष है — कृष्ण; यह दूसरा पुरुष कहां से आया? और जैसे ही शिष्यों ने यह संदेश पहुंचाया, गुरु उनके पीछे-पीछे दौड़ा। तो जिसे चाहिए, वह नारी है। अगर ये सब अवगुण आपके अंदर हैं, तो ताड़न — ताड़ना नहीं; ताड़ना का मतलब पीटना होता है, ताड़न का मतलब होता है सुधारना। अगर यह आप में है, तो आप अपने आप को सुधार लीजिए — इसका मतलब यह है। लेकिन इसको लोगों ने विवादित बना दिया।
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