आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0184 · भाग 23

गुरु जी, मुझे सिर्फ एक बात पता करनी है — जो लोग नशा करते हैं, वे इतने दयालु क्यों होते हैं, और जो नशा नहीं करते वे वैसे नहीं होते — ऐसा क्यों?

ऐसा नहीं है। नशा करने वालों की पत्नियों से जाकर पूछो, उनके बच्चों से पूछो, उनके बाप से पूछो — तब आपको समझ में आएगा कि नशा करने वालों की हालत क्या है; राक्षस बन जाते हैं। बस बाहर मीठी-मीठी बात करते हैं — पता है क्यों? जूते खाने के डर से। जैसे ही परिवार में पहुंचते हैं, परिवार वालों का जीना मुश्किल रहता है। एक शराबी की कहानी सुना रहा हूं: वह मांस खरीद के लाया और पत्नी से कहा बना, मैं आ रहा हूं। पत्नी ने रख दिया और काम में लग गई, कुत्ते ने खा लिया। अब पत्नी को पता है कि शराब पी के आएगा और मांस न मिला तो बहुत पीटेगा; उसने एक कुत्ते के बच्चे को काटकर पका दिया। लेकिन यह बात बालक देख रहा था। जैसे ही पिता खाने गया, लड़का बोला — "कहूं तो माई मारी जाए, नाहीं तो बाप कुत्ता खाए।" मतलब अगर सच्चाई कह दे कि पिताजी, तुम कुत्ते का मांस खा रहे हो, तो मां को पीटेगा; और नहीं बताता तो पिता कुत्ता खा रहा है — असमंजस में फंस गया। पिता खाते-खाते रुक गया, पूछा तू कह क्या रहा है? बोला कहूंगा तो मारोगे। बोला नहीं मारूंगा; जब बात पक्की हो गई तब उसने बताया — और उसी दिन से उसने नशे का त्याग कर दिया। तो नशेड़ी की हालत जाइए उनकी बहन-बेटियों, मां से पूछिए — गांजे वाले, चरसी, अफीमबाज — पूरे घर को नर्क बना के रखते हैं। समाज में बड़े अच्छे से रहते हैं, जूते खाने के डर से; कोई उनसे बड़ा मिलेगा तो भैया-भैया कहेंगे, और जैसे ही कमजोर मिल गया, फिर देखो। तो नशेड़ियों की माता-बहनों से पूछिए, समझ में आ जाएगा कितने दयावान हैं।

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वीडियो: साधक की दिनचर्या क्या होनी चाहिए ? / दिनचर्या साधक की #livesatsang · 2025-03-12