प्रश्नोत्तर P23-0193 · भाग 23
गुरु जी, शंकराचार्य जी ने कहा है कि मनुष्य शरीर, उसमें भी नर शरीर श्रेष्ठ है। इसे श्रेष्ठ क्यों कहा गया?
इसलिए कि यही एक ऐसा शरीर है जो परोपकार करता है; बाकी कोई शरीर परोपकार नहीं करता, इसलिए इसे श्रेष्ठ बोला गया। यह शरीर ऐसा है कि आए हुए अतिथि को खिला के खुद भूखा सो जाता है; आए हुए अतिथि को अच्छा बिस्तर देके, बिना उसको बताए, खुद बिना बिस्तर के सो जाएगा। यही एक शरीर है जिसके द्वारा सत्कर्म किया जाता है, और यही एक शरीर है जिसके द्वारा उस परम सत्ता से अपना मिलना कराया जा सकता है। यही एक शरीर है जिसके द्वारा पैदा करके खाया जा सकता है; बाकी जितने भी अन्य शरीर हैं, भोग-भोजन ढूंढते हैं। यही एक शरीर ऐसा है जो अन्य पशु-पक्षियों को चोट लगने पर मलहम लगाता है; जिसे नहीं जानता, उसे भी उठाकर हॉस्पिटल तक लेकर जाता है। पृथ्वी पर और कोई ऐसा शरीर नहीं है, जहां तक मैंने समझा — इसलिए यह शरीर श्रेष्ठ है।
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वीडियो: साधक की दिनचर्या क्या होनी चाहिए ? / दिनचर्या साधक की #livesatsang · 2025-03-12