प्रश्नोत्तर P24-0043 · भाग 24
गुरु जी, आपकी बातें तो बहुत अच्छी लगती हैं, लेकिन इनको लागू नहीं कर पा रहा; बहुत पापी हूं मैं, कृपया माफ कीजिए।
कोई बात नहीं है। पाप को हटा दो — तुम वही हो जो तुम थे — और फिर से जीवन की एक नई शुरुआत करो। हीरा कई सालों से अगर गटर में पड़ा रहे, उसको निकाल के बस धो दो, बस खत्म। अब वो बोले नहीं, मैं कई सालों से गटर में था — अरे, तू था, आजा इधर, अभी तुम्हें साफ करते हैं। जैसा था वैसा हो गया, बस खत्म बात। भ्रम हो गया गंदगी का।
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वीडियो: आत्म परिचय क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-07-06