आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0048 · भाग 24

गुरुदेव, इस जगत में समझ-समझ के कैसे निकलें?

आपको पता है ना क्या गलत है, क्या सही — तभी तो फंसे हो। अगर पता नहीं होता तो फंस भी नहीं पाते। तो आप गलत मत करिए। एक बात समझिए — 'मैं' दृष्टा है और 'है' परिवर्तनशील है। ये पूरा संसार 'है' है। मैं ने कुछ 'है' को अपना बनाया — 'मेरा' — और फिर उसे रोकना चाहता है। जब उसमें बदलाव होता है तो ये रोता है, और इसके तरीके से बदलाव हो गया तो खुश होता है। बस इसी में पड़ा है। सबको पता है कि ये रुकेगा नहीं, फिर भी रोकने के लिए अनेक उपाय करता है। कुछ समय के लिए लगता है रुक गया, पर वो आराम-आराम से बदल रहा है; यहां हर वक्त सब परिवर्तनशील है। आपको पता है कि हम दोनों शादी कर रहे हैं और एक दिन कोई छोड़ के जाएगा — जब जाते हैं तो रोते हो। ये तो पहले ही दिन पता था। तो आपको पता है कि आप जो भी कर रहे हो उसका परिणाम दुख है, फिर भी 'चलो कर लेते हैं' — तुरंत तो सुख है ना, बाद में दुख। बस यही चल रहा है जिंदगी में। जो करते हो उसका परिणाम पहले ही पता कर लो और उसके लिए भी तैयार रहो।

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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06