आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0052 · भाग 24

गुरु जी, पुनर्जन्म — अगला-पिछला जन्म होता है या नहीं? हमारे मजहब में तो ये माना नहीं जाता। क्या इसे जानना जरूरी है?

महाभारत की एक कहानी है — भीष्म पितामह जब शैया पर लेटे थे तो उन्होंने कहा, मैंने पूरा जीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया, आखिर मैं किस जन्म का पाप भोग रहा हूं? कहानी कहती है कि वो अपनी ऊर्जा से 20 जन्म पीछे गए, कुछ नहीं मिला; फिर 21वें जन्म में देखा कि राजकुमार थे और गुस्से में एक सर्प को तीर मारा था। अब देखिए, भीष्म पितामह 21वें जन्म तक गए, उन्हें ज्ञान नहीं हुआ; लेकिन अर्जुन एक जन्म भी पीछे नहीं गए, उन्हें ज्ञान भी हो गया, मोक्ष भी हो गया। तो हम काहे को अपनी ऊर्जा पीछे जाने में लगाएं? वो जिंदगी मैं जी के आया हूं, जा के पीछे क्या कर लूंगा? और अगर कोई कहे कि अगला-पिछला नहीं होता, तो बताइए — कोई अपाहिज पैदा होता है, कोई राजा के यहां, कोई रंक के यहां; कोई कुरूप, कोई सुंदर; कोई झोपड़ी में, कोई महल में; कोई पैदा होते ही ऐसा रोगी कि हाथ से पानी भी नहीं पी सकता। ऐसा क्यों? 'खुदा की मर्जी' — ऐसा खुदा कैसे हो सकता है कि जीवों को तड़पता छोड़ दे? कोई मां-बाप चाहेगा कि मेरे बच्चे ऐसे दुखी रहें? अगर दुनिया खुदा के, परमात्मा के हिसाब से चलती तो इतनी गंदी नहीं होती। सारा बुरा कर्म हम करते हैं, दोष उसको देते हैं। वो बालक तो अबोध है, उसे कर्म का सिद्धांत ही नहीं पता, उसमें राग-द्वेष, इच्छा-अपेक्षा कुछ नहीं — फिर क्यों इतना भोग रहा है? कुछ तो बात होगी — अगला-पिछला इसी से समझ में आता है। हमारे कर्म की वजह से ही हमें वैसा घर, धन, तन और ज्ञान का बल, वैसे माता-पिता मिलते हैं।

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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06