आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0053 · भाग 24

गुरु जी, जो हम अभी प्रेजेंट टाइम में लाइफ जी रहे हैं, क्या ये प्री-डिसाइडेड है? क्या इसमें हमारे पास फ्री विल कुछ नहीं है?

आपके बस में इतना है — ईमानदारी और बेईमानी, बस दो चीजें। अगर ईमानदारी करेंगे तो आप मुक्ति से मोक्ष तक जाएंगे; बेईमानी करेंगे तो आगे का बंधन बांध रहे हैं। कर्म के सिद्धांत को समझिए — आप पहले से सब फिक्स करके आए हैं और यहां कुछ फिक्स करना चाहते हैं। जैसे आपको इस सामान को यहां रखने का मौका मिला, तो यहीं रखना पड़ेगा। अब आप ईमानदारी से रखिए या बेईमानी से — ईमानदारी से रख लिया तो मुक्त हो गए, बेईमानी से रखा तो आगे का कर्मफल बांध लिया। लिखने वाले भी आप ही हो। लेकिन अब आप बदलना चाह रहे हो, क्योंकि देश-काल-स्थिति-परिस्थिति बदल गई है; जब लिख रहे थे तब परिस्थिति अलग थी। अब कह रहे हो 'मुझे और चाहिए', और उस 'और चाहिए' के लिए बेईमानी करने लगते हो, फिर बेईमानी में फंस जाते हो। सब फिक्स था, आप फिक्स करने में बुरी तरह फंस गए।

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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06