प्रश्नोत्तर P24-0061 · भाग 24
गुरुदेव, इटली, फ्रांस, यूरोप में तो लोग गरीब हैं ही नहीं, सरकार खुद मदद करती है — वहां सत्कर्म कैसे करेंगे?
क्या इटली में, फ्रांस में आपने किसी को रास्ता नहीं बताया? क्या लोग आपको ऑफिस वगैरह का रास्ता नहीं बताते? ये सत्कर्म है। फिर जीव-जंतुओं की सेवा भी हो सकती है। मान लीजिए कोई गिर गया तो आपने उठाया कि नहीं? ये सत्कर्म है — इसे गवर्नमेंट नहीं रोक सकती। हो सकता है कोई गिर गया तो दवाखाने तक ले जाना पड़ा, एंबुलेंस बुला दिया। कहने का मतलब, सत्कर्म का मौका प्रकृति हर समय देती है, हर जगह देती है। इंडिया में ज्यादा देती है, क्योंकि यहां बेईमानी-दुष्कर्म ज्यादा है, तो इसलिए ज्यादा देती है कि भैया निकल ले। ईमानदारी और सत्कर्म अपना लीजिए जीवन में, ये मूल है — चाहे जहां भी रहें। गवर्नमेंट कैसी भी व्यवस्था कर दे, कितना भी सिस्टम बना दिया जाए, कितना भी मैप बना दिया जाए, लेकिन कोई जिंदा आदमी चाहिए पता बताने के लिए।
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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06