प्रश्नोत्तर P24-0060 · भाग 24
गुरुदेव, लोग कहते हैं आंख बंद करके दो-तीन घंटे बैठे रहो। क्या ईमानदारी-सत्कर्म से उस परम सत्ता से मेरा डायरेक्ट कनेक्शन बन जाएगा?
मैं कह रहा हूं कोई भी व्यक्ति पूजा करे, पाठ करे, तपस्या करे, नमाज पढ़े, प्रार्थना करे, कुछ भी करे — अगर ईमानदारी-सत्कर्म ना करे तो उसका क्या होगा? कुछ नहीं होगा, पतन होगा। और ईमानदारी-सत्कर्म अपना ले, तो ये करे चाहे ना करे, कल्याण पक्का — वो आपसे आकर मिलेगा। सीधा, एकदम सीधा। इसीलिए तो मदर टेरेसा पूरी दुनिया में फेमस हो गईं — उन्होंने सिर्फ सत्कर्म किए। मूल यही है: जरूरतमंद की सेवा करना और ईमानदारी का जीवन। मैंने जहां तक समझा, हर व्यक्ति से वो मिलने के लिए तैयार है — एकदम पक्का, ये फाइनल है — बस तैयारी तुम्हारी हो जाए। बताने वाले अनेक विधियां बांट दिए, पर मूल नहीं बताए कि सर्वप्रथम, नमाज पढ़ने से पहले, पूजा करने से पहले, तपस्या करने से पहले ईमानदारी-सत्कर्म अपनाना। आप कर्म से फंसे हो, कर्म से ही निकल सकते हो — ताला जिस चाबी से बंद होता है उसी से खुलता है। अपने आप को पवित्र कराने के लिए ईमानदारी-सत्कर्म, बस। क्योंकि बेईमानी-दुष्कर्म में अनेक लोगों ने आपको श्राप दिया है। जब आप जरूरतमंद की सेवा करते हो, उसकी जरूरत पूरी कर रहे हो, तो आप उसके लिए भगवान हो जाते हो, मसीहा हो जाते हो। अब वो मसीहा को आशीर्वाद देता है — और भगवान को आशीर्वाद परमात्मा के अलावा कौन देगा? उस समय वो आशीर्वाद सीधा उस परम सत्ता से आता है। इसीलिए निर्विकार होने में, विकारों से और अपवित्रता से मुक्त होने में सहायता मिलती है। किसी जरूरतमंद की सेवा करके उसे कुछ देर देखो — वो मुंह से नहीं, रोम-रोम से आशीर्वाद दे रहा है। साधना का मतलब अपने आप को सुधारना।
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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06