प्रश्नोत्तर P24-0070 · भाग 24
गुरुजी, आत्मज्ञान मतलब क्या? क्या सारी इच्छाओं का अंत ही आत्मज्ञान है — मतलब बीवी-बच्चे सब छोड़ दिए जाएं?
आत्मज्ञान मतलब स्व के होने का ज्ञान, खुद के होने का ज्ञान। आप बाहर से — राग-द्वेष, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा, कर्ता के भाव से — छूट गए, स्व में आए, तो आपको आत्मदर्शन हुआ, अपने स्वयं के होने का बोध हुआ, प्रत्यक्ष हो गया। जब बाहर से आप पूरी तरह छूट जाओगे, हर चीज से कोई इच्छा नहीं, तब आत्मज्ञान होगा। बीवी को नहीं छोड़ना है, उम्मीद छोड़ देनी है। हो सकता है बीवी को छोड़ के हिमालय में चले जाओ — कुछ नहीं होगा, क्योंकि बीवी से जो चाहिए वो यहां फिट हो गया है, तो वहां सताएगा; जितना उसके साथ किया वो सब याद आएगा। चाहे जहां भी रहो, जिस-जिस तरीके से आपने उम्मीद बनाके रखी, वो छोड़ देनी है। लोगों को छोड़ने से कुछ नहीं होगा, उनसे उम्मीद छोड़ दो — कि उनसे ये फायदा होगा, ये नुकसान होगा। बस जरूरत में जियो, उम्मीद छोड़ दो। हमने अलग-अलग लोगों से अलग-अलग उम्मीदें बनाके रख दीं। उम्मीद छोड़ दोगे तो जरूरत में आ जाओगे। भाग-भाग के कुछ नहीं होगा। पहले तो उम्मीद छोड़ने का भाव बनाओ। जब मैंने भाव बनाया कि कुछ नहीं चाहिए, तो मुझे बीच में वो स्थिति हुई — कुछ नहीं चाहिए।
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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06