आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0072 · भाग 24

गुरुजी, इंसान इंसान की योनि में ही क्यों आया? और सब योनियों में तो कुछ है नहीं।

छूटना भी इसी योनि से है। बात ये है कि गलती आपसे एक हो गई — आपने अपने आप को इंसान समझ लिया, और इसे आपने जानवर समझ लिया। ये सबसे बड़ी भूल है, जो इस पृथ्वी पर मानव कर बैठा। ये मानव शरीर आपको मिला है; ये उन्हें भी मिलने वाला है। आप मानव नहीं हो। और जब तक आप अपने आप को मानव समझेंगे, आप मुक्त भी नहीं हो पाएंगे, मोक्ष भी नहीं होगा। छूटने का मार्ग इसी शरीर में है — इस शरीर में मुक्ति और मोक्ष है, कर्ता का अधिकार है। उसे पशु ना समझिए और अपने को मानव मत समझिए। मानव योनि में भी निकृष्ट कर्म करके आप वापस उधर जा सकते हो। आप भोग-भोजन में पड़े रहेंगे, योग नहीं करेंगे, अपने आप को नहीं साधेंगे, निकलने का प्रयास नहीं करेंगे — तो आपको क्या चाहिए, भोग-भोजन? तो जाओ उस शरीर में, करो भोग-भोजन फ्री में; वहां कोई समाज नहीं, कोई रोकने वाला नहीं। ये शरीर आपको योग के लिए मिला था; उसका उपयोग नहीं किया, तो फिर भोग और भोजन के लिए उस शरीर में जाओ — खोज के खाओ। उसमें जो ताकतवर है वो पहले खाता है, कमजोर बचा हुआ खाता है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06