प्रश्नोत्तर P24-0083 · भाग 24
गुरु जी, पितृ ऋण, देव ऋण, ऋषि ऋण क्या है? और गुरु दक्षिणा क्या होती है?
ऋण होता ही नहीं है — ना पितृ ऋण होता है, ना ऋषि ऋण, ना देव ऋण। होता ही नहीं; जबरदस्ती बना देते हैं। गुरु दक्षिणा एक होती है: गुरु अगर सिखा रहा है तो उसका भाव होता है कि तुम गुरु जैसे बनो। बन गए, वही गुरु दक्षिणा है। गुरु जिसके लिए ज्ञान दे रहा है, वो कर लिया, तो वही गुरु दक्षिणा है। वो नहीं कर पाए, तो कुछ भी दे दो, कोई मतलब नहीं है। स्कूल की शिक्षा आप किसके लिए लेते हो? रोजगार के लिए। यहां रोजगार नहीं, यहां आत्मिक कल्याण है। वो शिक्षा 'कुछ चाहिए' के लिए ले रहे हो; ये शिक्षा 'कुछ नहीं चाहिए' के लिए ले रहे हो।
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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06