आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0084 · भाग 24

गुरु जी, क्या आध्यात्म में चलने वाले कमजोर होते हैं? अगर नहीं, तो वो सांसारिक जीवन में पीछे क्यों रह जाते हैं — जैसे अंबेडकर, आइंस्टाइन, मैडम क्यूरी आदि संपन्न होते हैं?

वो जरूरत में जीते हैं। उन्हें पता है आखिरी क्या है। पता तो तुम्हें भी है, लेकिन तुम भोग की तरफ ज्यादा हो, इसलिए तुम ज्यादा कपड़े, ज्यादा वस्तुएं, ज्यादा सामान संग्रह करके रखते हो — क्योंकि तुम्हें अपने भविष्य का डर है। डरा हुआ आदमी हमेशा संग्रह करके रखता है, ये ध्यान देना। जितना डरा हुआ आदमी होगा, उतने उसके बैग में सामान मिलेंगे — दवा तक मिलेगी; बीमारी के पहले वो दवा रखे है, सर दर्द के पहले गोली रखे है। आध्यात्मिक व्यक्ति को पता चल जाता है कितनी जरूरत है — इससे ज्यादा ले के क्या करेंगे? जब जरूरत होगी तो देखेंगे। ऐसा नहीं कि वो कर नहीं सकते। लोग बोझा ढोते हैं और अपने को संपन्न समझते हैं; वो बोझा ढो रहे हैं। संपन्न तो वो है जो जरूरत में जी रहा है — ना उसे कोई डर है, ना भय।

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वीडियो: इस प्रकृति में पूर्ण कौन और अपूर्ण कौन है ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-06