प्रश्नोत्तर P24-0097 · भाग 24
गुरु जी, एक भोग की इच्छा बाकी है और एक जिम्मेदारी है, उसके अलावा संसार नहीं चाहिए। तो क्या भोग और भोग से मुक्ति — ये दोनों यात्राएं एक साथ चल सकती हैं? कृपया मार्गदर्शन कीजिए।
एक साथ चल सकती हैं, अगर आप ईमानदारी से करते हो — ईमानदारी, सत्कर्म के साथ। लेकिन कभी ना कभी, जब आपकी जिम्मेदारी-कर्तव्य पूरा हो जाए, आपको पूरी तरह लगना ही पड़ेगा। एक समय ऐसा आएगा, क्योंकि वो अवधूत की स्थिति ऐसे नहीं आने वाली; जब पूरी तरह लगोगे, तभी तो अवधूत की स्थिति आएगी।
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वीडियो: 28 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-22