आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0096 · भाग 24

गुरुदेव, यहां रहती हूं तो मैं सब भूल जाती हूं; महीनों की उपासना, 45-45 दिन के कोर्स करती हूं, तब भी घर की याद नहीं आती। पर जब जाना होता है तो एक-दो दिन पहले फिर याद करती हूं — ये क्यों होता है? समझ में नहीं आता मैं वापस क्यों जा रही हूं।

जब तू यहां रहेगी तो वहां धीरे-धीरे छूटेगा। जब तू यहां रहेगी तब पता चलेगा किसके प्रति आसक्ति है, किससे अटैचमेंट है, कहां लगाव है, कहां राग है, कहां द्वेष है। जब किसी से दूर होगी तब पता चलेगा उसके प्रति मोह कितना है। तो अपने आप को देखना है — मैं अगर अपने आत्मिक उद्धार के लिए आई, और जैसा मैं चाहती थी सब मिल गया, तो फिर मैं जा क्यों रही हूं? क्या जहां मैं हूं, वहां व्यवस्था नहीं है? और जाने का प्लान घर से ही बन जाता है कि बस सात दिन रह के आएगी; ये नहीं छोड़ा कि ज्यादा अच्छा लगेगा तो ज्यादा रह के आऊंगी। तो मैं यही कह रहा हूं — जिम्मेदारी-दायित्व अगर हो गया हो, तो तू कल्याण में पूरी तरह लग जा। तेरी रुचि यहां है, कहीं ना कहीं जिज्ञासा है, इच्छा है कि मैं मुक्त हो जाऊं; लेकिन मुक्ति के लिए अथाह प्रयास करना पड़ेगा — अथाह का मतलब जिसका आदि-अंत नहीं; कल्पना से परे इतना संघर्ष, मेहनत करेगी तब जाके निकाल पाएगी अपने आप को। अब तुम्हें भटकना नहीं है, क्योंकि तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर तुम्हें मिल गए। मैं अगर भटका, तो उत्तर के लिए भटका। आपको तो हर प्रश्न के उत्तर मिल गए, तो फिर आपको बस एकांत चाहिए, शुद्ध भोजन चाहिए, वह जगह चाहिए जहां दबाव-संकोच ना हो — वो आपको मिल गया। अब बस लग जा पूरी तरह — एकांतवास में, आत्मिक चिंतन में — कि मैं कहां उलझी हूं, कहां फंसी हूं, मुझे उपलब्धि क्यों नहीं हो रही। नहीं हो रही, तो इसका मतलब मैं कहीं ना कहीं फंसी हूं, सीधी सी बात है। जैसे मशीन नहीं चल रही तो इसका मतलब कुछ बिगड़ा है; मैकेनिक भी तुरंत नहीं खोज पाता, एक-एक तार चेक करता है, बहुत समय के बाद पाता है — जब तक देख ही नहीं पाएगा तो बनाएगा कैसे? तो पहले खोज ले कि मैं फंसी कहां हूं। तुम अगर नहीं निकाल पाई, तो गुरु मदद करेगा, गुरु की ऊर्जा तुझे खींचने में काम करेगी — लेकिन प्रयास पहले तेरा होगा, फिर वो तेरा सहयोग करेगा और निकाल ही देगा, क्योंकि गुरु में अथाह बल है। लेकिन गुरु पहले देखता है कि तू क्या चाहती है — अगर तुम नहीं निकलना चाहोगे, तो गुरु चाह के भी कुछ नहीं कर सकता, सिर्फ देख सकता है। तुम जब तैयार हो जाते हो, तब गुरु सहयोग करेगा और निकाल देगा।

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