आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0107 · भाग 24

गुरु जी, अब कोई प्रश्न नहीं रह गया, बस यही प्रश्न है कि मैं निकल क्यों नहीं रही हूं? मुझे ऐसा लगता था कि कुदरत अपने आप छुड़वा देगी।

अब तो तेरे ऊपर है ना। देख, जिम्मेदारी है, दायित्व है। जहां मैं हूं, वहां मेरा कोई काम नहीं है, तो मैं फिर वहां क्यों रुका हूं? और काम है, तो फिर जाना पड़ेगा, फिर छोड़ के भी नहीं जा सकते। तो देखो, जहां मैं हूं, वहां मेरा कोई काम है क्या? अगर काम है तब तो रुको, वो भी करो, ये भी करो; जब वो काम पूरा हो जाए तो पूरा इस तरफ चले आओ। और पता चला कोई काम नहीं है, फिर भी मैं वहां हूं — तब तो हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं ना। कुदरत तो — मैंने बताया ना, पेड़-पौधों पे होता है कि पत्ते का समय आएगा, गिर जाएगा, नया पत्ता आएगा। कुदरत कब छुड़वाएगी? जिस दिन शरीर से निकलना होगा। उसके पहले आपको जो करना है, कर लो। आप भौतिक जगत में भटकते हो, कि भौतिक जगत से मुक्त होने के लिए काम करते हो — अब आप क्या करते हो, आपके ऊपर है। प्राण तो समय पे छूटेगा। एक शरीर में हमारा एक समय है, उस समय का हमें नहीं पता; लेकिन जब तक सांस चल रही है, तब तक हम क्या कर रहे हैं, वो मायने रखता है। जैसे रात हम जहां सोए, तो सुबह वहीं से यात्रा होगी। तो हम जो भी करते हुए शरीर को छोड़ेंगे, वही तो आगे करेंगे। अगर हम साधना में शरीर छोड़ेंगे, तो साधना ही मिलेगी — ऐसे लोग मिलेंगे आसपास वाले कि वो मुझसे साधना ही करवाएंगे; जितनी अभी तक साधना हो रखी है, वही आगे कंटिन्यू होगी। अब आप कहां शरीर छोड़ते हो, किस भाव में शरीर छोड़ते हो, क्या करते हुए शरीर छोड़ते हो, कहां आप लिप्त हो — अपने कल्याण में कि संसार में — तो वही लोग मिलेंगे। और अगर उपलब्धि हो गई, तो बात ही खत्म हो गई।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: 29 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-22