प्रश्नोत्तर P24-0108 · भाग 24
गुरु जी, क्या इसी शरीर में भी उपलब्धि हो सकती है?
क्यों नहीं होगी? आप जहां छूटे, तहां हुआ। आप ही के तो ऊपर है। लेकिन उसके लिए काम करना पड़ेगा ना, तभी तो परिणाम आएगा। मैं कह सकूं कि मैं उपलब्धि के लिए पूरा प्रयासरत हूं — मैं यह कह सकूं। जैसे वकील के लिए कल बोला — वो पूरा प्रयासरत है ना, तो उसकी तो होनी ही होनी है, क्योंकि वो उपलब्धि के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है, कर रही है, दिन-रात लगी है। चक्कर आने पे भी काम करती है, गिर रही है लेकिन काम करती है; मैं मना करता हूं तो भी करती है। तो उसकी उपलब्धि तो पक्का है ना, क्योंकि वो पूरी तरह लग गई है — हर क्षण अपना सत्कर्म में दे रही है, लोगों की सेवा में दे रही है। और देखो, ये आप कह रहे हो — आप देख के कह रहे हो किस तरीके से वो लगी है। तुझे लग रहा है, लेकिन कहीं ना कहीं उसके पीछे की मेहनत तो देखी तूने?
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