प्रश्नोत्तर P24-0111 · भाग 24
गुरु जी, सेवा करते हुए साधना नहीं हो सकती क्या?
दोनों हो सकती हैं, दोनों साथ होती हैं। जैसे कोई सेवा कर रहा है, तो उसका एक क्षण भी बैठना बहुत हो गया। और उसकी पूरी जिम्मेदारी फिर उसकी हो जाती है, जिसके सानिध्य में वो सेवा कर रहा है। जिस कार्य में जिसने-जिसने भी सहयोग किया है, सबको आशीर्वाद जाएगा। अंतरात्मा से आशीर्वाद मिल रहा है — ये उसकी साधना है। उस आशीर्वाद में इतनी ऊर्जा होती है कि बड़े आसानी से उसकी यात्रा हो जाती है। साधना में हमेशा बैठा रहना नहीं है; हमें देखना है कि क्या सेवा है। सेवा करते हुए साधना बहुत अच्छा है — सही सेवा करना। लेकिन बिना जरूरत का भी नहीं; पहले जरूरत हो। सेवा मिलना भी इतना आसान नहीं है, सत्कर्म मिलना भी इतना आसान नहीं है। बस अपने आप को कैसे भी निकाल ले — मेहनत कर।
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