आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0110 · भाग 24

गुरु जी, सेवा में तो दिखता है कि हम कुछ कर रहे हैं — खुद को भी लगता है और गुरु की नजरों में भी रहता है। साधना में तो दिखता ही नहीं, और साधना में अहम नहीं आ जाएगा?

साधना में भी तो दिखता है। साधना भी अगर आप कर रहे हो, तो आपको दिखता है कि मैं तप कर रहा हूं। साधना गुरु के सानिध्य में करो। साधना में अहम कैसे आएगा? अहम तब आता है, जब आप साधना करते हो इच्छाओं की पूर्ति के लिए। अगर साधना आत्मिक कल्याण के लिए कर रहे हो, मुक्ति के लिए कर रहे हो, मोक्ष के लिए कर रहे हो — राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा, कर्ता के भाव से मुक्त होने के लिए कर रहे हो — तो अहम कैसे आएगा? अहम तो बेईमानी में आएगा, ईमानदारी में कभी आएगा ही नहीं। अगर भौतिक चीजें चाहिए, ताकत चाहिए कि मुझे समाज को झुकाना है, मुझे नाम-शोहरत-पैसा चाहिए, तो उसमें अहम आएगा। और मुझे तो मुक्त होना है, तो इसमें अहम आ ही नहीं सकता। मुझे बेईमानी छोड़नी है, इसमें क्या अहम? बेईमानी करने में अहम है, छोड़ने में नहीं। मान के चक्कर में अहम है, लेकिन मान छोड़ने में अहम नहीं आएगा।

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