प्रश्नोत्तर P24-0119 · भाग 24
गुरु जी, आपने कल बोला था कि यहां से छोड़ोगे तो अगला वही मिलेगा। अगर मैं वापस उन्हीं लोगों के बीच जाकर उनमें लग गई और शरीर छूट गया, तो अगला जन्म कहां होगा?
जहां लगी रहेगी, वहीं मिलेगा। अब तू यहां है, अब इस स्थिति में अगर शरीर छूटता है तो तेरा जन्म तो साधना में ही होगा। अब तू जैसे ही वहां से वहां जाएगी, उन लोगों में लगेगी, अगर वहां शरीर छूटा तो तेरा शरीर उन लोगों के आसपास ही आएगा। जैसे देख, कोई घर लेता है तो छिपकली आ जाती है — छिपकली का उस घर से कोई रिश्ता है, ऐसे नहीं आ गई। चूहे का रिश्ता है उस घर से, वो उस घर में दौड़ रहा है, उस व्यक्ति के साथ घूम रहा है। हम लोग घर बनाते हैं, छिपकली कहां से आ जाती है? रिश्ता है उसका, कोई रिश्ता है। तो ऐसे — अगर हमें मानव शरीर नहीं मिला, हो सकता है उन्हें मानव शरीर मिले, तो हम उनके आसपास ही रहेंगे; चाहे कुत्ता, कुछ भी हो, हम आसपास रहेंगे और अपना उद्देश्य पूरा करेंगे। जितने लोगों से मेरा लेनदेन है, उतनों के आसपास हम जन्म लेते हैं। इसलिए हो सकता है अगला शरीर मिले तो उसमें मोह-माया में, इच्छाओं में जकड़े रहो; फिर जब समझ आए तो समय चला जाए; और हो सकता है फिर मार्ग ही ना मिले। बहुत लोगों को मार्ग भी नहीं मिल पाता, जन्म-जन्म लग जाते हैं मार्ग मिलने में। अभी समय भी है, समझ भी है — इसी में निकाल ले अपने आप को।
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