प्रश्नोत्तर P24-0133 · भाग 24
गुरु जी, जब से पति गए हैं, मन बहुत पीछे जाता है, उनकी बहुत याद आती है। क्या करूं?
देखो, क्या होता है कि कोई भी आपकी जिंदगी से जाए — चाहे राग में, चाहे द्वेष में — उसकी याद तो आनी ही आनी है। अब देखना यह है कि जब तक वो मेरे साथ था, मैंने क्या किया। जाना तो होगा — चाहे आपका, चाहे उसका, जिंदा या मुर्दा, एक दिन। अगर संयोग है तो वियोग है। अब देखना यह है कि संयोग हुआ और फिर वियोग होने तक मैंने क्या किया? जिस रोल को लिया, जैसा रिश्ता मैंने बनाया, क्या उस रिश्ते को मैंने 100 में 101% निभाया? बिछड़ना तो पक्का है। आप मत ये सोचिए कि साथ में रह के बस हम साथ ही रहेंगे। नहीं, एक दिन तो जाना ही है। वो जाने से पहले आपने उनके साथ क्या किया, वह देखो। तो यही है — आप इन सब बातों को समझते हुए अपने जीवन में क्या लक्ष्य बनाए हैं, उस पे ध्यान दीजिए। उस लक्ष्य पर पूरी तरह काम करिए। जब आप उस लक्ष्य पर पूरी तरह काम करेंगे तो एक दिन परिणाम आएगा, और परिणाम होगा तो वहां आप होंगे, क्योंकि लक्ष्य और आप अलग नहीं हैं। बस कर्म करके उस लक्ष्य तक पहुंचना है, लेकिन उस लक्ष्य तक कर्म करके ही पहुंचा जा सकता है, बातों से नहीं।
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