प्रश्नोत्तर P24-0165 · भाग 24
गुरु जी, सत्य हर जगह है, हर समय है — अभी अगर हम उसे नहीं देख पा रहे तो कुछ आवरण है। वह आवरण क्या है?
मैं कब कहता हूं भगवान हर जगह, हर क्षण है? मैंने कभी नहीं कहा। मैं तो कहता हूं — वो परमात्मा, चाहे ईश्वर कहो, इस दुनिया से परे है। लोग कहते हैं, मैं नहीं बोलता। और आवरण — उम्मीद। उम्मीद आवरण है, बात खत्म। जब तक उम्मीद है, तब तक आप अलग हो; उम्मीद का अलगाव है। उम्मीद चाहे किसी चीज की भी हो, क्या फर्क पड़ता है — इनको दिल्ली जाना है, आपको मुंबई जाना है; दिशाएं अलग हैं लेकिन जा तो रहे हो। उम्मीद किसके सहारे खड़ी है? 'कुछ चाहिए' के सहारे। कुछ चाहिए में उम्मीद खड़ी है; कुछ नहीं चाहिए तो उम्मीद गई, बात खत्म। ये तुरंत, अभी हो सकता है। फिर आप जो साधना कर रहे हो, वो आप देखो आप क्या कर रहे हो; जिसने साधना बताई है उसको पकड़ो, उससे पूछो कि इस साधना को करने से होगा क्या — वही बताएंगे। उम्मीद हट गई तो यही अवस्था मौन भी है। वहीं तक तो आना है; वहीं तक आने के लिए तो सब कुछ किया जा रहा है।
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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08