प्रश्नोत्तर P24-0166 · भाग 24
गुरु जी, क्या कोई किताब या कोई गुरु आपके मार्ग में सहायक रहे?
मैंने किताबें बहुत पढ़ीं, लेकिन मैं बोल नहीं सकता कि ये किताब सहायक रही। सहायक रहती तो मैं बोल देता कि इस किताब के द्वारा मैं पहुंचा। हर किताब पढ़ने के बाद इतना समझ में आया कि जो मुझे समझना है वो इसमें नहीं है — जो इसमें लिखा है वो मेरे काम का नहीं, और जो मेरे काम का है वो इसमें लिखा नहीं। इसलिए मैं किसी किताब का नाम भी नहीं ले सकता। उन्होंने अपने-अपने तरीके से बोला है; मुझे किस तरीके से करना है, वह मैं करूंगा। आदमियों से भी मिला तो यही समझ में आया — इनके पास बहुत अनुभव है, लेकिन वह अनुभव मेरे काम का नहीं। लेकिन कहीं ना कहीं उस समय को बिताने में वो किताबें और वो आदमी सहायक रहे, क्योंकि ज्ञान तो 2020 में हुआ; 2011 से 2020 तक क्या करता? कुछ ना कुछ तो करता ही। मेरा तो अब कहना है — बस अपनी किताब पढ़ लो, देख लो अपनी किताब में क्या-क्या लिखा है। लिखते वक्त परेशान नहीं हुए, तो पढ़ते वक्त क्यों परेशान हो जाते हो? लिखा भी हमने, तो पढ़ना भी हमें है; पढ़ लोगे तो आप मुक्त हो जाओगे। हम बगैर पढ़े ही निकलना चाहते हैं — लेकिन लिखा क्यों, जब नहीं पढ़ना था?
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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08