आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0170 · भाग 24

गुरु जी, आपके सानिध्य में मेरी जो स्थिति बनी, वो मैं आपसे ही शेयर कर सकता हूं; पर यह भी पता है कि मेरी स्थिति कोई टिकी नहीं है। अब यह स्थिति आगे कहां बनती है?

जैसे ही लगे कि मुझे समझ में आ गया, तो बस समझ लेना कि अब ये टिकेगा नहीं, अब ये जाने वाला है। कोई स्थिति टिकती नहीं है। आइसक्रीम खाते हो ना — हाथ में लेकर देखते रहो, गलती जाती है, गिरती जाती है, आखिर में डंडी हाथ में रह जाती है। स्थिति टिकानी ही तो नहीं है; टिकती ही नहीं है, तो क्या टिकाओगे? जो आवरण चढ़ा हुआ है, सब धीरे-धीरे निकल जाएगा, और आखिर में डंडी बचेगी — उस डंडी की कोई कीमत नहीं, वो बिकेगी नहीं, लोग चूस के फेंक देते हैं। आखिर में शरीर का क्या होता है? जला दिया जाता है। प्याज है — छीलते जाओ, छीलते जाओ; बस आखिर में छीलने वाला बचता है।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08