प्रश्नोत्तर P24-0179 · भाग 24
गुरु जी, अंदर की यात्रा तो मुझे अब क्लियर है कि क्या करना है, पर बाहर की उलझनें — कुछ सालों से कर्ज की परेशानी है, मेहनत भी कर रहा हूं, फिर भी मन बहुत परेशान रहता है। क्या करूं?
उससे आराम से आप निकल सकते हो। जैसे कहीं कर्ज लिया तो कोई प्रॉपर्टी ही बनाई होगी — उस प्रॉपर्टी को निकालो, दे दो। लेकिन वहां लगता है मान गिर जाएगा। क्यों फंसे हो? निकाल दो प्रॉपर्टी, बात खत्म; एक दिन में निकल जाओगे। घुट-घुट के जीने का क्या मतलब — प्रॉपर्टी रखी है और हम घुट के जी रहे हैं, तगादा सुन रहे हैं; भोजन है और हम भूखे हैं। बहुत आसानी से हम निकल सकते हैं, लेकिन एक बात बताएं — हम निकलना ही नहीं चाहते। ज्यादा फैलाव हमने कर दिया। अब पूरी तरह अपने काम में भी लग सकते हो, अपने में भी, क्योंकि काम के द्वारा ही तो अपने आप को शुद्ध करना है। लोगों ने कहा काम अलग है और ये अध्यात्म अलग है — ये फंसा दिया है लोगों को। ये नहीं देखा कि काम करते हुए ही अपने आप को शुद्ध करना है; काम ही सहायक बनेगा। प्रॉपर्टी तुम्हारे द्वारा बनी थी, तुम प्रॉपर्टी के द्वारा नहीं बने; फिर बना लोगे। और अगर प्रॉपर्टी नहीं है तो या तो समझा दो कि भर दूंगा, या जब चुकाने के योग्य हो जाओ तब आके चुका दो। टेंशन ना पालो, घुट के ना जियो।
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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08