प्रश्नोत्तर P24-0181 · भाग 24
गुरु जी, विश्लेषण में बैठता हूं तो एक चीज खटकती है — किसी से मुझे पैसे लेने थे, बहुत बार फोन किया पर उसने दिए नहीं, एक प्रकार से धोखा हो गया। उसका बिजनेस में लॉस हुआ था, बहुत लोगों का कर्ज उस पर है। उससे निकलने के लिए मैं क्या करूं — उम्मीद छोड़ दूं या कानूनी कार्रवाई करूं?
देखिए, उसकी स्थिति-परिस्थिति क्या है — वो देने लायक है और नहीं दे रहा, या देने लायक नहीं है? नियत की बात है। दो बातें हैं। अगर नियत उसकी खराब है, तब तो आपको पूरी ताकत लगा के लेनी चाहिए — जितनी ताकत है वसूलने में लगा दो। और अगर वह मजबूर है, उसकी परिस्थिति गड़बड़ है, और आप उस लायक हो कि उतना पैसा सह सकते हो, कोई बड़ी बात आपके लिए नहीं है, तो छोड़ दो। उसको बोल भी दो — "मैं समझ गया, आपके पास नहीं है; जब आपके पास होगा तो दे देना।" ये आपको जांचना पड़ेगा। जब उसको बोलोगे कि जब आपको मिलेगा तब देना, तब उसका ख्याल अच्छा रहेगा, आपके लिए उसका वाइब्रेशन अच्छा छूटने लगेगा। भूलना बात नहीं है, ऐसे नहीं भूला जाता। बस इतनी सी बात है — नियत खराब है तो वसूल लो, मजबूर है तो छोड़ दो और बोल दो।
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वीडियो: ध्यान कैसे करें । ध्यान कैसे करते हैं ।ध्यान मे ध्यान । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-14