आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0187 · भाग 24

गुरुदेव जी, मेरा एक सवाल है — अपने देश में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिनकी इनकम इतनी कम है कि वो इकट्ठा कर ही नहीं सकते। उनके लिए क्या?

मैं जिसकी है उसकी बात कर रहा हूं, जिसकी नहीं है उसकी बात नहीं कर रहा। आंतरिक यात्रा तभी होगी जब आप संपन्न हैं। अगर आप संपन्न नहीं हैं, मजबूर हैं, लाचार हैं, तो आपकी आंतरिक यात्रा हो ही नहीं सकती — आप करो भी मत, आपसे होगी ही नहीं। आध्यात्मिक यात्रा संपन्न व्यक्ति करता है; अभाव-कुभाव वाला नहीं कर पाता। वो अपने आप को लायक बनाए। अब आपको चिंता है पेट की रोटी की, तो अंतर्मुखी यात्रा कैसे होगी? संपन्नता जरूरी है, इसलिए तो मैंने कहा — संपन्न होके इसमें आइए। पड़े रहने का मतलब क्या है? कि अब मुझे कोई टेंशन नहीं है; जब तक मैं इस शरीर में रहूंगा, तब तक इस शरीर की व्यवस्था मैंने कर ली। शरीर की व्यवस्था के बाद आंतरिक यात्रा होगी। आध्यात्मिक यात्रा संपन्न व्यक्ति कर सकता है — लालच त्याग दे और संपन्न हो जाए, तब कर सकता है।

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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27