आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P24-0188 · भाग 24

गुरु जी, आपने बताया कि लगातार ध्यान रखना है कि ये मेरा टारगेट है। बहिर्मुख में बार-बार अभ्यास से मुझमें परफेक्शन आई, वहां मैंने समय, मेहनत, रातों की नींद दी। तो अब मुझे बाहर का सारा अटैचमेंट, हर चीज छोड़ के अंतर्मुखी हो जाना है — क्या पड़े रहने का मतलब अपने अंदर ही रहना और सारी चीजें छोड़ देना है?

सारी चीज तो छोड़ ही नहीं सकते। उन चीजों को छोड़ो जिनसे चिंतन बढ़ता है। सारी चीजों का मतलब आपने क्या समझा? मैंने एक फार्मूला दिया है आप लोगों को — ईमानदारी, सत्कर्म, योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग। अगर इस फार्मूला को आपने पकड़ लिया, तो आगे का बंधन बढ़ेगा ही नहीं। वो इतना सूक्ष्म रूप से काम कर जाता है। इसीलिए तो आश्रम बनाए गए, कुटिया बनाई गई, कि आप एकांतवास में जाओ, वहां समझ में आएगी। कभी ना कभी आपको निकलना पड़ेगा — इसीलिए तो कहा गया, निकल सकते हो तो 60 के बाद निकलो। आपको घर से निकलना ही पड़ेगा, नहीं तो निकालेंगे। जब तक आप काम के हो, नहीं निकालेंगे; जिस दिन काम के नहीं रहोगे, तब घर वाले निकाल देंगे।

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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27