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प्रश्नोत्तर P3-0066 · भाग 3

पड़े रहना क्या साधना है? भगवान हमारे कर्म देख रहे? गलतियां कैसे स्वीकारें?

पड़े रहना — ना सोना ना जागना; साक्षी भी वहां नहीं जब कुछ करोगे। मूर्ति आंखों वाली — काल्पनिक; मनुष्य बनाता। ऐसा कर्म नहीं कि भगवान देखे। दुनिया में कोई दूध का धुला नहीं। गिरे कर्म से — कर्म से उठ भी सकते। पहले स्वीकार: गिरी हूं, गलतियां-अपराध; पश्चाताप। किसी से मत बताओ — हंसी के पात्र; गुरु के अलावा। गुरु आंतरिक दाग देखता जैसे मां शरीर के दाग — शुद्ध करता, छिपाता। इसलिए सर्वश्रेष्ठ गुरु सानिध्य। मां-पिता शरीर/संसार लायक; गुरु परम सत्ता लायक।

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वीडियो: पार्ट 1 कैसे कहूं ,तेरी कृपा भी नहीं चाहिए ? योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-03